यरुशलम को ट्रंप मानेंगे इजरायल की राजधानी, जानें क्या है विवाद की कहानी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता दे दी। इसके साथ ही अमेरिता अपना दूतावास तेल अवीव से हटाकर येरुशलम ले जाएगा। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने कहना है कि येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देना एक ऐतिहासिक और वास्तविक है। अधिकारियों का कहना है कि इजरायल की ज्यादातर सरकारी एजेंसियां और पार्लियामेंट तेलअवीव के बजाय येरूशलम में ही हैं, जबकि अमेरिका और अन्य देशों के दूतावास तेल अवीव में हैं। एक और वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप अपने एक बड़े चुनावी वादे को पूरा करेंगे।

व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप बुधवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर 1 बजे यरुशलम को लेकर अपनी नीति का ऐलान करेंगे। येरुशलम प्राचीन काल से ही यहूदी लोगों की राजधानी रही है और आधुनिक सच्चाई यही है कि इजरायल की सरकार का मुख्यालय, कई प्रमुख मंत्रालय, संसद और सुप्रीम कोर्ट यरुशलम में ही है।’

अपने बयान में ट्रंप विदेश मंत्रालय को यह भी निर्देश देंगे कि अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से येरुशलम शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। नए दूतावास के लिए उचित जमीन खोजने और निर्माण में कम से कम 2-3 साल लगेंगे। इजरायल-फलस्तीन विवाद में येरुशलम का दर्जा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इजरायल और फिलिस्तीन दोनों इसे अपनी राजधानी बताते हैं।

तुर्की के उप प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर येरुशलम का दर्जा बदला जाता है तो यहां बड़ी तबाही होगी। इससे क्षेत्र में संवदेनशील शांति प्रक्रिया पूरी तरह नष्ट हो जाएगी और नया विवाद, नए संघर्ष बढ़ेंगे और नए सिरे से अशांति फैल जाएगी। वहीं अमेरिकी सेनेटर बर्नी सैंडर्स ने ट्रंप की इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी कदम से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति समझौते की संभावना को जोरदार झटका लगेगा। इस क्षेत्र में आशांति फैल जाएगी।