प्रमोशन में आरक्षण मामलाः सुप्रीम कोर्ट दे सकता है थोड़ी देर में बड़ा फैसला

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भोपाल। प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को कोई बड़ा फैसला दे सकता है। राज्य सरकार समेत दोनों पक्ष दिल्ली में डंटे हुए हैं। लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में सभी किसी बड़े फैसले की उम्मीद जता रहे हैं।

मध्यप्रदेश का प्रमोशन में आरक्षण का यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट की बेंच में पहले नंबर पर लगा है। इससे पहले 29 मार्च को इस प्रकरण में सुनवाई हुई थी। तभी बेंच ने यह प्रकरण दूसरी बेंच को स्थानांतरित कर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने कहा था कि इस बेंच में शामिल एक जज ऐसे ही एक अन्य मामले में फैसला दे चुके हैं, इसलिए बेंच इस मामले को स्थानांतरित कर रही है। यह प्रकरण बिहार और त्रिपुरा के ऐसे ही प्रकरण में मर्ज कर दिया गया।

फिर टल सकता है मामला
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को मध्यप्रदेश के इस फैसले पर सुनवाई होगी। कुछ कर्मचारी नेताओं को आशंका है कि फैसला फिर टल सकता है। लेकिन, आरक्षण की मांग करने वाला वर्ग और आरक्षण का विरोध कर रहा कर्मचारियों का पक्ष किसी बड़े फैसले की उम्मीद जता रहे हैं।

क्या हुआ था पिछली पेशी पर
मध्यप्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण के मामले में 29 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई फिर टल गई। टलने की वजह जस्टिस दीपक गुप्ता के इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग होना है। उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। तभी तय हो गया था कि अब जस्टिस एसएस बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच इस मामले की सुनवाई 10 अगस्त को करेगी।

इस साल कब-कब टली सुनवाई
21 फरवरी को भी सुनवाई टल गई थी।
2 फरवरी को भी इस मसले पर सुनवाई टल गई थी।
25 जनवरी को हुई सुनवाई में सरकारी वकील हरीश साल्वे अनुपस्थित रहे।

2002 में लागू हुआ था पदोन्नति में आरक्षण
2002 में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण को लागू किया था, जो वर्तमान में शिवराज सरकार ने भी लागू कर रखा है, लेकिन इस फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को लोक सेवा (पदोन्नति) नियम 2002 खारिज किया है। तभी से दोनों वर्ग अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें सरकार आरक्षित वर्ग के साथ खड़ी है।

MP हाईकोर्ट ने दिए थे प्रमोशन छीनने के आदेश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 2002 में सरकार द्वारा बनाए गए नियम को रद्द कर 2002 से 2016 तक जिन्हें नए नियम के अनुसार पदोन्नति दी गई है उन्हें रिवर्ट करने के आदेश दिए थे। मप्र सरकार ने इसी निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पीटिशन (LIP) लगा रखी है।

UP में हो चुके हैं कई अफसरों के डिमोशन
इससे पहले उत्तरप्रदेश में भी कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण को रद्द कर दिया था। इसके बाद डिमोशन का सिलसिला शुरू हो गया था। इससे उत्तरप्रदेश ने बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों को बड़े पदों से वापस छोटे पदों पर डिमोट कर दिया था।

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