भाजपा-कांग्रेस में सिंधिया घराने को लेकर जुबानी जंग बढ़ी

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भोपाल। भाजपा नेताओं ने बयान को सही ठहराते हुए कहा कि इतिहास नहीं बदला जा सकता। आजादी के पहले सिंधिया अंग्रेजों के साथ थे। कांग्रेस नेताओं ने बयान पर भाजपा को ही घेरा। कांग्रेस का कहना है, भाजपा आजादी के संघर्ष में अपनी भूमिका बताए। वहीं, नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह ने यह कहकर किनारा कर लिया कि सिंधिया घराना खुद अपना बचाव करेगा। उन्होंने कहा कि राजमाता के सामने बोलने की किसी की हिम्मत नहीं थी।

सीएम ने अपमान किया है :
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा कि सीएम पहले राजस्थान सीएम वसुंधरा और मंत्री यशोधरा राजे का मत बताएं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा ने कहा, सीएम ने राजमाता सिंधिया के परिवार पर निशाना साध कर उनका अपमान किया है।

इतिहास नहीं बदल सकते
सिंधिया घराने के बारे में मुख्यमंत्री ने जो कहा वो इतिहास की बात थी। इतिहास बदला नहीं जा सकता। सभी जानते हैं कि आजादी से पहले सिंधिया कांग्रेस के साथ थे और आजादी के बाद वो भाजपा के साथ आ गए।
– नंदकुमार सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा

13 साल कार्यकाल के बाद सीएम अब ओछी राजनीति की राह चल पड़े हैं। यह उनकी कार्यशैली के विपरीत दिखता है। कारण जो भी हो। आजादी के संघर्ष की बात है तो पहले वे अपनी विचारधारा का योगदान बताएं।
– अरुण यादव,प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

सिंधिया घराने ने आजादी के पहले स्वार्थ की राजनीति की थी ये सभी जानते हैं। उस वक्त सिंधिया घराने के अंग्रेजों का साथ देने से क्रांतिकारियों को हार का मुंह देखना पड़ा था। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया आज भी एेसी ही राजनीति करते हैं।
– प्रभात झा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा

राजमाता के सामने बोलते
राजमाता ने ही जनसंघ को खड़ा किया था। आज सीएम सिंधिया परिवार के खिलाफ बोल रहे हैं, राजमाता के सामने किसी की बोलने की हिम्मत नहीं थी। उम्मीद है कि सिंधिया परिवार ही इस मसले पर खुद का बचाव करेगा।
– अजय सिंह, नेता-प्रतिपक्ष, विधानसभा, मध्यप्रदेश

इधर,यौन शोषण मामले में अदालत पहुंचे पूर्व वित्त मंत्री –
जिला अदालत भोपाल में गुरुवार को पूर्व वित्त मंत्री राघवजी पर लगे यौन शोषण के आरोप संबंधी मामलों की सुनवाई हुई। इसमें पूर्व मंत्री भी मौजूद रहे। विशेष सत्र न्यायाधीश आरपी सोनी की कोर्ट में राघवजी के वकील ने साक्ष्य के तौर पर शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सीडी को स्वीकार नहीं करने का अनुरोध किया। इसका विशेष लोक अभियोजन अधिकारी पीएन सिंह राजपूत ने आपत्ति ली। उन्होंने अदालत से कहा कि यह अर्जी केवल मामले के फैसले में विलंब करने के लिए लगाई गई है। उन्होंने इसे खारिज करने की मांग की। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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