मीटिंग में कांग्रेस पार्षद का आरोप, 2 सौ Cr. का लेन-देन, सौ से ज्यादा प्रोजेक्ट अधूरे

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भोपाल .नगर निगम परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्षद गिरीश शर्मा ने आरोप लगाया कि नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने 115 अधूरे प्रोजेक्ट्स के कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। इसमें बिल्डरों से 200 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ है। इस पर महापौर आलोक शर्मा ने कमिश्नर प्रियंका दास को निर्देश दिए हैं कि बिल्डिंग परमिशन शाखा में पदस्थ अफसरों को हटाकर आरोपों की जांच कराई जाए। जोन 18 अौर 19 से जांच शुरू कर 10 दिन में रिपोर्ट सौंपें। बैठक में महापौर, निगम अफसरों पर जमकर बरसे। उन्होंने निगमायुक्त को भी नसीहत दी। महापौर ने कहा कि आप नगर निगम की कार्यप्रणाली को समझ लीजिए। यहां अन्य सरकारी दफ्तरों की तरह काम नहीं होता है।

– दरअसल, पार्षद शर्मा के प्रश्न को लेकर निगम प्रशासन की लापरवाही से बात बिगड़ गई और महापौर ने सदन में इस पर नाराजगी भी जताई। क्योंकि प्रश्न के जवाब में महापौर ने लिखित उत्तर पढ़ा कि विस्तृत जानकारी इकट्ठा की जा रही है।

– इसके जवाब में शर्मा ने कहा कि उनके पास जानकारी है। उन्होंने 115 सर्टिफिकेट की सूची सदन के पटल पर रख दी। इस पर महापौर नाराज हो गए। उन्होंने स्वीकार किया कि यह नगर निगम प्रशासन की लापरवाही है। अफसर काम नहीं करना चाहते।

– पार्षद अमित शर्मा ने इस मामले में न्यायिक जांच की मांग की। महापौर ने कहा कि वे इस बारे में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा करेंगे।

अपर आयुक्त की सफाई, एक भी सर्टिफिकेट जारी नहीं किया
– अपर आयुक्त मलिका निगम नागर ने दैनिक भास्कर से कहा कि भूमि विकास नियम की धारा 102 के तहत बिल्डिंग कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। एक भी प्रोजेक्ट में कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है। यह सर्टिफिकेट नगरपालिक निगम अधिनियम की धारा 301 के तहत जारी होते हैं। इसके बाद ही बंधक प्लाॅट छोड़े जाते हैं। ऐसे में लेन-देन का आरोप निराधार है।

सुबह सात बजे घर से नहीं निकल सकते तो तबादला करा लें
– महापौर ने अफसरों को नसीहत दी कि वे यदि वे सुबह सात बजे फील्ड में निकल कर सफाई का जायजा नहीं ले सकते तो तबादला करा लें। नगर निगम में ऐसे अफसर काम नहीं कर सकते। अफसरों को फील्ड में भी रहना पड़ेगा और पार्षदों के फोन भी उठाना पड़ेंगे।

आयुक्त को नसीहत अधिकारों का विकेंद्रीकरण करें
– महापौर ने आयुक्त को भी नसीहत दी कि वे अपर आयुक्त व अन्य विभागाध्यक्षों को भी कुछ अधिकार दें। कांग्रेस पार्षद अब्दुल शफीक ने आरोप लगाया था कि दरोगा को बदलने से लेकर हर छोटे- बड़े काम के लिए आयुक्त की अनुमति लगती है। आखिर अपर आयुक्तों को किस बात की तनख्वाह दे रहे हैं?

मलिका और सलूजा पर हो सकती है कार्रवाई
– ज्यादातर सर्टिफिकेट अप्रैल से जुलाई के बीच जारी हुए हैं। इस अवधि में अपर आयुक्त मलिका निगम नागर व सिटी प्लानर जीएस सलूजा थे। निगमायुक्त ने बताया कि मामले का परीक्षण कराया जा रहा हैं। जो भी प्रथमदृष्ट्या दोषी नजर आएंगे उन्हें हटाएंगे। संभवत: बुधवार सुबह तक आदेश जारी हो जाएंगे।